पश्चिम बंगाल — हालिया विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदरूनी संकट गहराता हुआ नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई लोकसभा सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और उनमें से एक बड़ा समूह पार्टी छोड़कर भाजपा का रुख कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में टीएमसी के कुल 29 सांसदों में से लगभग 12 सांसद पहले ही भाजपा में शामिल होने या उसे समर्थन देने की योजना बना चुके हैं। इसके अलावा पांच-छह अन्य सांसदों से भी बातचीत जारी बताई जा रही है। यदि यह समूह एक साथ एक्टिव हो जाए तो दल-बदल विरोधी कानून की कार्रवाई से बचने के लिए कम से कम 19-20 सांसदों को एक साथ जुटाने की रणनीति बनाई जा रही है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि टीएमसी नेतृत्व को संभावित टूट की भनक लग चुकी है और पार्टी को एकजुट रखने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी तथा उनके भतीजे व राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीब माने जाने वाले कुछ सांसदों का नाम भी शामिल है, जो भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इन दावों पर किसी भी पक्ष से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा की नजर राज्यसभा पर भी
लोकसभा में फिलहाल भाजपा के पास 240 सांसद हैं और सरकार सहयोगी दलों के समर्थन से चल रही है। यदि टीएमसी के कई सांसद भाजपा के साथ आ जाते हैं तो पार्टी की ताकत और बढ़ जाएगी तथा सरकार की सहयोगियों पर निर्भरता कम होगी। सूत्रों का कहना है कि भाजपा लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी टीएमसी के सांसदों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
टीएमसी के भीतर संगठनात्मक असंतोष की भी बातचीत हो रही है; कुछ पदाधिकारियों ने पार्टी की कार्यशैली और केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर गहरी नाराज़गी जताई है। लेकिन फिलहाल इन मुद्दों पर आधिकारिक बयान नहीं मिला है।
शुभेंदु की बैठक और काकोली की मौजूदगी
बंगाल की राजनीति में नया मंच तब बना जब सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई प्रशासनिक बैठक में टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार भी पहुंचीं। कल्याणी विश्वविद्यालय के एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में आयोजित तीन जिला प्रशासनिक बैठक में काकोली के अलावा कुछ अन्य टीएमसी विधायकों की उपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है।
मीडिया से बातचीत में काकोली ने कहा, “प्रशासन सबका होता है,” जिसके बाद अटकलें तेज हो गईं कि क्या वे जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकती हैं। उन्होंने इस विषय पर सीधे टिप्पणी से परहेज किया। चुनावों में हार के बाद काकोली को लोकसभा की मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी से हटाया गया था और बाद में उन्होंने बारासात जिला अध्यक्ष का पद भी छोड़ दिया था। रिपोर्ट में ये भी कहा जा रहा है कि देगंगा और स्वरूपनगर के विधायक भी बैठक में मौजूद थे।
क्या होगा प्रभाव?
यदि टीएमसी के सांसदों का बड़ा पलायन होता है तो न केवल केंद्र में भाजपा की संख्या बढ़ेगी बल्कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व के लिए अब चुनौती यह है कि वह संगठन को बांधे रखे और संभावित टूट को रोकने के उपाय लागू करे।